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चलो साथ चलते हैं

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सतारा* खिसक लिया अठारह आ गया धीमा था वो साल मंथर गति धीमी प्रगति आर्थिक मोर्चे पर विफल प्रदूषण में अव्वल जीएसटी का जाल बाजार बेहाल प्याज-टमाटर लाल रेल हादसे बाबाओं के जंजाल। दस साल बीत गये दुनिया की मंदी को सुना है अब कुछ होगा वक्त बदलेगा डॉलर दौड़ेगा रुपया भी चलेगा। एक जनवरी शुरू है दिन सोमवार है दस बज गये कोहरा बरकरार है ऐसा ही चलेगा खास नहीं बदलेगा बादशाह जो भी बोले देश को बुखार है। चलो साथ चलते हैं एक-एक कदम बढ़ते हैं उम्मीद पर दुनिया कायम है यही सोचकर गहरी सांस लेकर फिर हिम्मत करते हैं नये साल को नये जज्बे से दिल से सलाम करते हैं। (* पंजाब में सत्रह को सतारा बोलते हैं) Email: narvijayindia@gmail.com 

फिर तो हिंदी की गंगा बहेगी

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हिंदी के लिए एक अच्छी खबर है। हमारे प्रधानमंत्री जी हिंदी में बोलते हैं। अब लगता है कि राष्ट्रपति भी हिंदी में भाषण दिया करेंगे। केंद्र सरकार के अनेक मंत्री हिंदी में बात करते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी की हिंदी तो लाजवाब है। एकदम संस्कृतनिष्ठ, शुद्ध हिंदी। सुन कर आनंद की अनुभूति होती है। वहां के पिछले दोनों मुख्यमंत्री हिंदी बोलते तो थे, लेकिन देहाती लहजे में। मायावती तो एक-दो लाइन भी बिना पढ़े नहीं बोल पाती हैं। मुलायम सिंह की हिंदी माशा अल्लाह। शब्द गोल-गोल होकर उनके मुंह में ही कुश्ती लड़ते रहते थे।   दरअसल, आधिकारिक भाषाओं पर संसद की समिति ने हिंदी को लोकप्रिय बनाने के लिए 117 सिफारिशें की थीं। छह साल बाद, इनमें से कुछ अब अमल में आने की संभावना बनती दिख रही है। राष्ट्रपति ने कई सिफारिशों पर अपनी सहमति जता दी है। यदि यह निर्णय लागू हो गया तो सरकारी कामकाज में हिंदी का दबदबा बढ़ेगा। नेता और अधिकारियों के लिए हिंदी में लिखना-बोलना अनिवार्य हो जायेगा। होना भी चाहिए। हिंदी हमारी राजकीय भाषा है। देश का बड़ा तबका हिंदी में ही अपनी बात कहता-सुनता है। ...

बेटी, मैं हर वक्त तुम्हारे साथ हूं

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कल एक फोन आया। करीब तीस साल बाद सुनी वो आवाज। तब वेे जिला सूचना अधिकारी हुआ करते थे मेरे शहर में। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे मैंने अपने एक मित्र के साथ मिलकर अपने स्कूल में एक प्रदर्शनी लगायी थी- "अखबार और तकनीक" विषय पर।  वे मुख्य अतिथि थे।  उनके हिसाब से देश में शायद अपनी तरह का पहला आयोजन था वो। सब कुछ रील की तरह घूम गया दिमाग में।  औपचारिक बातचीत के बाद उन्होंने बड़े ध्यान से बेटियों से जुड़ा एक अच्छा संदेश दिया। मन को छू गयी वो बात। बोले, हर पिता को अपनी बेटी से यह अवश्य कहना चाहिए कि-  "बेटी, मैं हर वक्त तुम्हारे साथ हूं। तुम्हारे हर सही-गलत निर्णय में तुम्हारे साथ हूं। तुम जो करना चाहोे। मैं हमेशा तुम्हारी ताकत बनकर रहूंगा। मैं इस घोंसले में तुम्हारी ताकत हूं ।  जब तुम दूर चली जाओगी, तुम्हारा नया घोंसला होगा, तब भी मैं तुम्हारी ताकत रहूंगा। बेटी मैं सदैव तुम्हारे साथ हूं और  हमेशा तुम्हारी ताकत  रहूंगा।" सच में, एक पिता के तौर पर बेटियों को यदि यह अहसास कराया जाये कि वे कभी भी अकेली नहीं हैं, तो उनका मनोबल बढ़ा रहेगा। वे अपने स...

टीवी वाले अंकल और स्कूल वाली आन्टी से एक सवाल

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भारतीय शिक्षा प्रणाली में पहले कमियां थीं, जो आज और अधिक हो गयी हैं। तीस साल पहले पढ़ाई के विकल्प सीमित थे; आज व्यापक हैं, लेकिन शिक्षा का स्तर गिर चुका है। स्कूलों से निकलने वाले एक ओर ऐसे छात्र हैं जो टॉपर हैं, तो दूसरी ओर भारी तादाद ऐसे छात्रों की है, जो किसी काम के नहीं हैं। न उन्हें सिर का पता है, न पैर का। व्यावहारिक ज्ञान की जो अनिवार्य डोज हर किसी को चाहिए, वो अधिकांश छात्रों को मिल ही नहीं रही। सरकारी स्कूलों में लापरवाही का रवैया है, तो निजी विद्यालयों का मकसद पैसा कमाना रह गया है। कोई नहीं पूछता विद्यार्थिंयों से कि आगे जीवन में उन्हें किस तरह की नॉलेज चाहिए होगी। सामान्य ज्ञान का एक निश्चित स्तर तो हर छात्र के लिए अनिवार्य होना ही चाहिए। व्यवहार गणित, भाषा पर पकड़, सामान्य बुद्धि और सामान्य ज्ञान हर किसी को चाहिए ही चाहिए। चाहे उसे लिपिक बनना हो या अधिकारी, अपना व्यवसाय करना हो या नौकरी। स्कूल, कॉलेज ढीले पड़े हैं, दूसरी ओर तकनीक तरक्की पर है। बच्चों के हाथों में कम्प्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन आ गये हैं। गूगल की शक्ति है, परंतु खुद की नॉलेज नहीं है। अंग्रेजी स...

सुबह की शांति और कैमरे की क्लिक

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सवेरे जल्दी उठने की सलाह हर कहीं से मिलती रही है। बचपन से ही। ब्रह्मचर्य की एक पुस्तक पढ़कर तब कुछ दिन ब्रह्म-मुहूर्त में उठना शुरू भी किया था। पर वो सब अधिक दिन नहीं चल पाया। पत्रकारिता के दिनों में देर रात तक अखबार के दफ्तर में जागना और सुबह देर से उठना - एक नियम बन गया था यह। वह आदत मानो मेरे जीन्स में समा गयी।  आज भी देर तक जागना और देर से उठना, यही चलता आ रहा है। वैसे आज की पूरी जैनरेशन में देर रात तक इंटरनेट, चैटिंग, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि में लगे रहना आम बात है। इसे ही कूल माना जाता है। इंटरनेट जैनरेशन के मित्रों का दायरा भी दुनिया भर में फैला होता है। भारत में जब रात होती है, यूरोप और अमेरिका में तब दिन होता है। जाहिर है, वहां बैठे दोस्तों से बतियाने के लिए तो रात में ही चैट करनी होगी। यह बात पुरानी जैनरेशन के लोग भला कैसे समझ पायेंगे।  देर तक सोने के बहाने चाहे जो बनाये जायें, सच तो यह है कि सुबह-सुबह उठने में आनंद बहुत है। सूरज उगने से पूर्व वायुमंडल में जो शीतलता, शांति और सुकून होता है, वो पूरे दिन नहीं मिलता। चंडीगढ़ की तेज रफ्तार सड़कें भी सुबह को खाली-...

बेटियों से सवाल, और बेटों को खुला छोड़ दिया है?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल देश के माता-पिताओं से पूछा है। दुष्कर्म की घटनाओं से सिर शर्म से झुक जाता है, यह कहने के बाद उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ बेटियों से ही क्यों? कहां जा रही हो? कब आओगी? क्यों जा रही हो? कभी बेटों से सवाल करने की हिम्मत की है कि बेटा कहां थे रात भर? कुछ गलत तो नहीं कर रहे हो? ऐसा नहीं है तभी तो दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं? बेटों को शिक्षा, संस्कार और चरित्र का पाठ घर से ही पढ़ाया जाना चाहिए। परंतु ऐसा हो नहीं रहा है। यह बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर अक्सर कम अक्ल नेता बेहूदे बयान देते रहते हैं। कोई कहता है कि लडक़े तो लडक़े हैं, तो कोई कहता है कि लड़कियों को कैसे कपड़े पहनने चाहिए। ऐसे बुद्धिहीन और चरित्रहीन पुरुषों के कारण ही अपराध बढ़ रहे हैं। मोदी पहले ऐसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं जिन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारी के प्रति आगाह किया है। जिन्होंने स्त्रियों के सम्मान और स्वतंत्रता की सही मायने में व्याख्या की है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हर देश वासी को संकल्प लेना चाहिए कि वो महिलाओं के सम्मान की खातिर जहां ह...