खुश रहने के कितने पैसे लगते हैं?
वर्तमान में जिएं और प्रसन्न रहें : भिक्खू संघसेना एक पत्रकार मित्र की फेसबुक पोस्ट देखी तो मैं सोच में पड़ गया। उनकी पत्नी ने लिखा था - ' एक अच्छी फैमिली फोटो , क्योंकि हम अक्सर एक साथ समय नहीं बिता पाते हैं और एक शादी के मौके पर हम आज इतने खुश हैं , जितना पहले कभी नहीं थे … बंगाली शादियां होती ही ऐसी हैं , वे आपको बेहद खुश कर देती हैं। ' मित्र पत्रकार हैं , तो जाहिर है कि परिवार को कम ही समय दे पाते होंगे। पत्रकारों का जीवन होता ही ऐसा है। दुनिया भर की खुशियों और गम में शरीक होते हैं , पार्टियों में जाते हैं , देश - विदेश भी घूम आते हैं , लेकिन अकेले ही। न तो इतनी छुट् टी मिल पाती है , न इतने पैसे होते हैं कि मनचाहे ढंग से परिवार के साथ घूम - फिर सकें। कहीं दूर चले भी गये तो वापस लौटने पर कुर्सी मिलेगी या छिन जायेगी , इसकी धुकधुकी अलग से लगी रहती है। शाम दफ्तर में बीतती है और पूरा शहर जब सो जाता है , तब घर...